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ट्रम्प ने केविन वार्श को फेडरल रिजर्व का नेतृत्व करने के लिए चुना: मौद्रिक नीति के भविष्य पर मंडराते सवाल

यदि पुष्टि हो जाती है, तो केविन वार्श अमेरिकी मौद्रिक नीति क

ट्रम्प ने केविन वार्श को फेडरल रिजर्व का नेतृत्व करने के लिए चुना: मौद्रिक नीति के भविष्य पर मंडराते सवाल
Ekhbary Editor
1 day ago
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भारत - इख़बारी समाचार एजेंसी

ट्रम्प ने केविन वार्श को फेडरल रिजर्व का नेतृत्व करने के लिए चुना: मौद्रिक नीति के भविष्य पर मंडराते सवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा फेडरल रिजर्व के अगले अध्यक्ष के रूप में केविन वार्श को चुनने की संभावना ने वैश्विक वित्तीय हलकों में गहन बहस और विश्लेषण को जन्म दिया है। यदि सीनेट द्वारा उनकी पुष्टि की जाती है, तो वार्श अमेरिकी मौद्रिक नीति की कमान संभालेंगे, एक ऐसा पद जो देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय स्थिरता को भी सीधे प्रभावित करता है। यह नियुक्ति ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रही है जब कई प्रमुख अर्थशास्त्री और नीति निर्माता फेडरल रिजर्व की निर्वाचित अधिकारियों से पारंपरिक स्वतंत्रता को गंभीर खतरे में देख रहे हैं। यह स्थिति न केवल केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता के लिए, बल्कि अमेरिकी आर्थिक प्रबंधन के दीर्घकालिक प्रक्षेपवक्र के लिए भी गहरे सवाल खड़े करती है।

केविन वार्श कौन हैं? वह एक अनुभवी अर्थशास्त्री और पूर्व निवेश बैंकर हैं, जिन्होंने 2006 से 2011 तक फेडरल रिजर्व के गवर्नर के रूप में कार्य किया है। इस अवधि के दौरान, उन्होंने 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान फेड की प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। फेड से बाहर निकलने के बाद, वार्श स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के हूवर इंस्टीट्यूशन में विशिष्ट फेलो के रूप में अकादमिक और नीतिगत चर्चाओं में सक्रिय रहे हैं। उनके आर्थिक विचार अक्सर रूढ़िवादी और बाजार-उन्मुख रहे हैं, जो कम ब्याज दरों और फेडरल रिजर्व की बैलेंस शीट के आकार के बारे में चिंता व्यक्त करते हैं। उनके नाम पर विचार किए जाने की खबर ने इस अटकल को बल दिया है कि ट्रम्प प्रशासन एक ऐसे फेड प्रमुख की तलाश में है जो मौद्रिक नीति के प्रति अधिक आक्रामक दृष्टिकोण अपनाए और संभवतः राजनीतिक इच्छाओं के प्रति अधिक उत्तरदायी हो।

फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता अमेरिकी आर्थिक नीति की आधारशिला रही है। यह केंद्रीय बैंक मूल्य स्थिरता बनाए रखने और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देने के अपने दोहरे जनादेश को पूरा करने के लिए राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर निर्णय लेने में सक्षम है। यह स्वतंत्रता फेड को अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देती है। हालांकि, हाल के वर्षों में, राजनीतिक हस्तक्षेप के बढ़ते आह्वान और ट्रम्प प्रशासन के खुले बयानों ने इस पारंपरिक अलगाव को कमजोर कर दिया है। फेड के पूर्व अध्यक्षों, जैसे पॉल वोल्कर और एलन ग्रीनस्पैन, ने अपनी स्वतंत्रता को सख्ती से बनाए रखा, जिससे उन्हें कठिन आर्थिक निर्णय लेने में मदद मिली, भले ही वे लोकप्रिय न हों। वार्श की नियुक्ति से यह सवाल उठता है कि क्या वह इस परंपरा को कायम रखेंगे या क्या वह प्रशासन के विचारों के प्रति अधिक झुकाव रखेंगे।

यदि वार्श फेड की बागडोर संभालते हैं, तो अमेरिकी मौद्रिक नीति में संभावित बदलावों पर विचार करना महत्वपूर्ण है। उनके अतीत के बयानों से पता चलता है कि वह उच्च ब्याज दरों के पक्षधर हो सकते हैं और फेड की विशाल बैलेंस शीट को कम करने के लिए एक अधिक आक्रामक दृष्टिकोण अपना सकते हैं। यह दृष्टिकोण मौजूदा आर्थिक माहौल में महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में स्थिर वृद्धि देखी जा रही है, बेरोजगारी दर कम है, और मुद्रास्फीति फेड के लक्ष्य के आसपास बनी हुई है। हालांकि, वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। यदि वार्श वास्तव में अधिक आक्रामक मौद्रिक कसने की नीति अपनाते हैं, तो इससे आर्थिक विकास धीमा हो सकता है, वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है, और अमेरिकी डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे निर्यात प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, उनके समर्थक तर्क दे सकते हैं कि यह दृष्टिकोण भविष्य में मुद्रास्फीति के दबावों को रोकने और फेड को भविष्य के संकटों से निपटने के लिए अधिक नीतिगत गुंजाइश प्रदान करने के लिए आवश्यक है।

एक फेड अध्यक्ष का चुनाव केवल एक तकनीकी निर्णय नहीं होता है; यह एक गहरा राजनीतिक और आर्थिक बयान भी होता है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने फेड की नीतियों पर अपनी असहमति व्यक्त करने में संकोच नहीं किया है, अक्सर ब्याज दरों को बहुत अधिक रखने के लिए इसकी आलोचना की है। ऐसे में, एक ऐसे व्यक्ति का चयन जो प्रशासन के आर्थिक दर्शन के साथ अधिक संरेखित हो, फेड की कथित स्वतंत्रता को और कमजोर कर सकता है। यह चिंता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया भर के अन्य केंद्रीय बैंक भी राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता कम होती है, तो यह वैश्विक केंद्रीय बैंकिंग के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है, जिससे नीतिगत निर्णयों में राजनीतिकरण बढ़ सकता है और वित्तीय प्रणाली में विश्वास कम हो सकता है।

सीनेट में वार्श की पुष्टि प्रक्रिया निश्चित रूप से गहन जांच का विषय होगी। सीनेटर उनसे मौद्रिक नीति, फेड की स्वतंत्रता, और वित्तीय विनियमन के प्रति उनके दृष्टिकोण के बारे में कठिन सवाल पूछेंगे। डेमोक्रेटिक सीनेटर संभवतः फेड की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए उनकी प्रतिबद्धता पर विशेष ध्यान देंगे, जबकि रिपब्लिकन सीनेटर उनके मौद्रिक सिद्धांतों और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की उनकी क्षमता पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। इस प्रक्रिया का परिणाम न केवल वार्श के भाग्य का निर्धारण करेगा, बल्कि फेडरल रिजर्व की संस्थागत अखंडता के लिए एक संकेत भी देगा।

वित्तीय बाजार वार्श की संभावित नियुक्ति पर बारीकी से नजर रखेंगे। निवेशक और व्यापारी मौद्रिक नीति में किसी भी बदलाव के संकेतों की तलाश करेंगे जो उनके निवेश निर्णयों को प्रभावित कर सकता है। यदि बाजार को यह आशंका होती है कि फेड अधिक राजनीतिक हो जाएगा या नीतिगत अप्रत्याशितता बढ़ेगी, तो इससे अस्थिरता बढ़ सकती है। इसके विपरीत, यदि वार्श एक स्पष्ट और सुसंगत नीतिगत ढांचा प्रस्तुत करने में सफल होते हैं, तो यह कुछ हद तक निश्चितता प्रदान कर सकता है। बांड बाजार, विशेष रूप से, फेड की ब्याज दर नीति के प्रति संवेदनशील होते हैं, और वार्श के तहत दरों में वृद्धि की संभावना से बांड की कीमतें गिर सकती हैं।

दीर्घकालिक दृष्टिकोण से, यह नियुक्ति फेडरल रिजर्व के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण प्रस्तुत करती है। क्या यह अपनी पारंपरिक भूमिका को एक स्वतंत्र, गैर-राजनीतिक आर्थिक प्रबंधक के रूप में बनाए रखेगा, या क्या यह एक नए युग में प्रवेश करेगा जहां राजनीतिक दबाव मौद्रिक नीति के निर्णयों में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है? यह सवाल केवल संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि फेडरल रिजर्व दुनिया का सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंक है। वार्श के नेतृत्व में, फेड को न केवल घरेलू आर्थिक चुनौतियों का सामना करना होगा, बल्कि वैश्विक व्यापार युद्धों, भू-राजनीतिक संघर्षों और तकनीकी व्यवधानों जैसे बाहरी कारकों के प्रभाव से भी निपटना होगा। इन चुनौतियों के बीच, फेड की विश्वसनीयता और स्वतंत्रता को बनाए रखना सर्वोपरि होगा।

संक्षेप में, केविन वार्श को फेडरल रिजर्व का नेतृत्व करने के लिए ट्रम्प का चुनाव एक महत्वपूर्ण और संभावित रूप से परिवर्तनकारी निर्णय है। यह अमेरिकी मौद्रिक नीति के पाठ्यक्रम, फेड की स्वतंत्रता के भविष्य और वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए गहरे निहितार्थ रखता है। आने वाले महीने इस बात पर प्रकाश डालेंगे कि क्या वार्श फेड की पवित्र स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे, या क्या अमेरिका एक ऐसे केंद्रीय बैंक के युग में प्रवेश करेगा जो राजनीतिक हवाओं के प्रति अधिक संवेदनशील है।