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दक्षिण अफ्रीका ने इज़राइली दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' घोषित किया, राजनयिक संबंधों में गंभीर तनाव

प्रिटोरिया का यह कदम गाजा में जारी संघर्ष और फिलिस्तीनी अधिक

दक्षिण अफ्रीका ने इज़राइली दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' घोषित किया, राजनयिक संबंधों में गंभीर तनाव
Ekhbary Editor
1 day ago
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दक्षिण अफ्रीका - इख़बारी समाचार एजेंसी

दक्षिण अफ्रीका ने इज़राइली दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' घोषित किया, राजनयिक संबंधों में गंभीर तनाव

दक्षिण अफ्रीका ने इजरायली दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स, एरियल सीडमैन को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' (अवांछित व्यक्ति) घोषित कर दिया है। यह घोषणा प्रिटोरिया और तेल अवीव के बीच पहले से ही तनावपूर्ण राजनयिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण गिरावट का प्रतीक है, खासकर गाजा पट्टी में इज़राइल के सैन्य अभियानों के मद्देनजर। यह कदम दक्षिण अफ्रीका की सरकार द्वारा इजरायल के कार्यों की लगातार आलोचना और फिलिस्तीनी अधिकारों के लिए उसके दृढ़ समर्थन की एक और कड़ी है।

राजनयिक भाषा में, 'पर्सोना नॉन ग्राटा' की घोषणा का मतलब है कि एक विदेशी राजनयिक को मेजबान देश में रहने की अनुमति नहीं है और उसे देश छोड़ने का आदेश दिया जाता है। यह अक्सर एक देश द्वारा दूसरे देश के साथ अपनी गहरी असहमति या नाराजगी व्यक्त करने का एक गंभीर तरीका होता है। दक्षिण अफ्रीका के इस कदम को गाजा में चल रहे मानवीय संकट और इज़राइल की नीतियों के प्रति उसकी बढ़ती हताशा की सीधी प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी तुलना दक्षिण अफ्रीका अक्सर अपने स्वयं के रंगभेद के इतिहास से करता रहा है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

दक्षिण अफ्रीका और इज़राइल के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से जटिल रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका ने लंबे समय से फिलिस्तीनी कारण का समर्थन किया है, जो अपने स्वयं के रंगभेद विरोधी संघर्ष में समानताएं देखता है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमलों के बाद गाजा में इज़राइल के सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से यह संबंध तेजी से बिगड़ा है। दक्षिण अफ्रीका ने इजरायल पर नरसंहार का आरोप लगाया है और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की है, जिसमें इजरायल से गाजा में अपनी कार्रवाई रोकने का आह्वान किया गया है।

ICJ में दक्षिण अफ्रीका की याचिका ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया और कई देशों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। दक्षिण अफ्रीका ने तर्क दिया है कि इज़राइल गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार सम्मेलन का उल्लंघन कर रहा है, और उसने न्यायालय से तत्काल उपायों का आदेश देने का अनुरोध किया है। हालांकि ICJ ने इजरायल को नरसंहार का आदेश नहीं दिया, लेकिन उसने इजरायल को नरसंहार के कृत्यों को रोकने और गाजा में मानवीय स्थिति में सुधार के लिए सभी आवश्यक उपाय करने का आदेश दिया।

इस राजनयिक निष्कासन से पहले, दक्षिण अफ्रीका ने इज़राइल के साथ अपने राजदूत को वापस बुला लिया था और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इज़राइल की नीतियों की लगातार निंदा की थी। सरकार और प्रमुख राजनीतिक हस्तियों ने गाजा में स्थिति को 'नरसंहार' और 'युद्ध अपराध' के रूप में वर्णित किया है, जो दोनों देशों के बीच संबंधों में एक गहरे और वैचारिक विभाजन को दर्शाता है।

राजनयिक निहितार्थ और भविष्य की संभावनाएं

एरियल सीडमैन को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' घोषित करने का निर्णय एक प्रतीकात्मक लेकिन शक्तिशाली संदेश है। यह दर्शाता है कि दक्षिण अफ्रीका अब सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि ठोस राजनयिक कार्रवाई से अपनी नाराजगी व्यक्त करने को तैयार है। इस कदम से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध लगभग न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाएंगे, हालांकि पूर्ण राजनयिक संबंध विच्छेद की घोषणा अभी नहीं की गई है।

इस कार्रवाई के कई तात्कालिक और दीर्घकालिक निहितार्थ हो सकते हैं। तात्कालिक रूप से, यह इज़राइली दूतावास के परिचालन को प्रभावित करेगा और दोनों देशों के बीच किसी भी प्रत्यक्ष संचार चैनल को और सीमित कर देगा। दीर्घकालिक रूप से, यह दक्षिण अफ्रीका और इज़राइल के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इन क्षेत्रों में संबंध पहले से ही तनावपूर्ण थे, इसलिए इस कदम का व्यापक आर्थिक प्रभाव सीमित हो सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, दक्षिण अफ्रीका का यह कदम उन देशों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है जो गाजा में इज़राइल की कार्रवाई के बारे में चिंतित हैं। यह अन्य देशों को भी इसी तरह की राजनयिक कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है, या कम से कम इज़राइल पर दबाव बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। हालांकि, यह भी संभव है कि कुछ देश इस कदम को अत्यधिक या अनुचित मानकर इसकी आलोचना करें।

घरेलू राजनीतिक प्रभाव

दक्षिण अफ्रीका में, यह कदम सत्तारूढ़ अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस (ANC) के लिए घरेलू स्तर पर समर्थन जुटाने में मदद कर सकता है। ANC ने लंबे समय से फिलिस्तीनी कारण का समर्थन किया है, और यह कार्रवाई उसके राजनीतिक आधार को मजबूत कर सकती है, खासकर ऐसे समय में जब देश में आम चुनाव नजदीक हैं। कई दक्षिण अफ्रीकी नागरिक फिलिस्तीनियों के साथ एक मजबूत एकजुटता महसूस करते हैं, और सरकार की इस तरह की कार्रवाई को व्यापक जन समर्थन मिलने की संभावना है।

हालांकि, इस कदम से कुछ वर्गों में चिंताएं भी बढ़ सकती हैं, खासकर उन लोगों में जो राजनयिक संबंधों के पूर्ण विच्छेद और इसके संभावित परिणामों को लेकर चिंतित हैं। दक्षिण अफ्रीका में एक छोटा लेकिन प्रभावशाली यहूदी समुदाय भी है, जो इस निर्णय की आलोचना कर सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और विश्लेषण

इस राजनयिक निष्कासन पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियाएं विभाजित होने की संभावना है। फिलिस्तीनी समर्थक देश और संगठन दक्षिण अफ्रीका के इस कदम की सराहना करेंगे, इसे इज़राइल पर दबाव डालने और फिलिस्तीनी अधिकारों की रक्षा के लिए एक आवश्यक कदम मानेंगे। वहीं, इज़राइल के सहयोगी, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और कुछ यूरोपीय देश, इस कदम की आलोचना कर सकते हैं, इसे अनावश्यक रूप से उत्तेजक और राजनयिक समाधान की संभावनाओं को कम करने वाला बता सकते हैं।

राजनयिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण अफ्रीका का यह कदम इज़राइल के खिलाफ अपनी कानूनी और नैतिक स्थिति को मजबूत करने के व्यापक अभियान का हिस्सा है। ICJ में उसकी याचिका और अब यह राजनयिक कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के सिद्धांतों के आधार पर इज़राइल को जवाबदेह ठहराने के उसके दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि यह कदम इज़राइल को अपनी नीतियों में बदलाव करने के लिए तुरंत मजबूर नहीं करेगा, लेकिन यह निश्चित रूप से इज़राइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव को बढ़ाएगा।

यह घटना मध्य पूर्व में व्यापक भू-राजनीतिक तनावों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के ध्रुवीकरण को भी रेखांकित करती है। गाजा संघर्ष ने दुनिया भर में देशों को विभाजित कर दिया है, कुछ इज़राइल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य फिलिस्तीनियों के मानवाधिकारों और मानवीय स्थिति पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका ने इस बहस में एक स्पष्ट और मुखर पक्ष लिया है, और उसकी नवीनतम राजनयिक कार्रवाई इस स्थिति की पुष्टि करती है।

निष्कर्ष

दक्षिण अफ्रीका द्वारा इज़राइली दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' घोषित करना दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह गाजा में चल रहे संघर्ष के प्रति दक्षिण अफ्रीका की गहरी नाराजगी और फिलिस्तीनी अधिकारों के लिए उसके अटूट समर्थन को दर्शाता है। यह कदम न केवल द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, जिससे इज़राइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ सकता है। यह घटना इस बात की पुष्टि करती है कि गाजा संघर्ष केवल मध्य पूर्व का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक ऐसा मुद्दा है जिसने वैश्विक राजनयिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित किया है।