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Sunday, 01 February 2026
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सोना और चांदी: तेजी के बाद कीमतों में भारी गिरावट, फेडरल रिजर्व के वॉर्श के बयान से बाजार को मिली राहत

बहुमूल्य धातुओं के बाजार में अस्थिरता: सोने में 9.7% और चांद

सोना और चांदी: तेजी के बाद कीमतों में भारी गिरावट, फेडरल रिजर्व के वॉर्श के बयान से बाजार को मिली राहत
Ekhbary Editor
1 day ago
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भारत - इख़बारी समाचार एजेंसी

सोना और चांदी: तेजी के बाद कीमतों में भारी गिरावट, फेडरल रिजर्व के वॉर्श के बयान से बाजार को मिली राहत

वैश्विक कमोडिटी बाजारों में एक नाटकीय बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ हाल ही में रिकॉर्ड ऊँचाइयों पर पहुँचे सोना और चांदी अब तेजी से नीचे गिर रहे हैं। यह गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है, जबकि कुछ इसे बाजार के सामान्यीकरण के संकेत के रूप में देख रहे हैं। विशेष रूप से, सोने की कीमतों में 9.7% की उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे यह 4,829 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। वहीं, चांदी की स्थिति और भी गंभीर है, जिसकी कीमत में 31% की भारी गिरावट दर्ज की गई है और यह 78.7 डॉलर प्रति औंस पर पहुँच गई है। यह तीव्र संकुचन ऐसे समय में आया है जब फेडरल रिजर्व के एक प्रमुख सदस्य, वॉर्श के बयानों ने बाजार में एक नई उम्मीद और स्थिरता का संचार किया है।

बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में यह उछाल अक्सर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति की आशंकाओं के समय देखा जाता है, जब निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश में होते हैं। पिछले कुछ समय से, दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएँ कोविड-19 महामारी के बाद से मंदी और मुद्रास्फीति के दोहरे खतरों से जूझ रही थीं, जिसके कारण सोने और चांदी को 'सुरक्षित आश्रय' संपत्तियों के रूप में भारी मांग मिली थी। केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाई गई ढीली मौद्रिक नीतियों, जिसमें ब्याज दरों को कम रखना और बाजारों में तरलता डालना शामिल था, ने भी इस तेजी को बढ़ावा दिया था। निवेशक डॉलर की अस्थिरता और इक्विटी बाजारों में संभावित गिरावट से बचने के लिए इन धातुओं की ओर रुख कर रहे थे, जिससे इनकी कीमतें लगातार बढ़ती जा रही थीं।

हालांकि, अब स्थिति बदलती दिख रही है। फेडरल रिजर्व, जो दुनिया के सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंकों में से एक है, के एक वरिष्ठ अधिकारी वॉर्श के हालिया बयानों ने बाजार में सकारात्मकता का संचार किया है। हालांकि उनके बयानों का सटीक विवरण सार्वजनिक रूप से व्यापक रूप से नहीं बताया गया है, लेकिन बाजार विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और भविष्य की मौद्रिक नीति के संबंध में ऐसे संकेत दिए हैं, जिन्होंने निवेशकों की चिंता को कम किया है। आमतौर पर, जब केंद्रीय बैंक के अधिकारी आर्थिक स्थिरता और नियंत्रित मुद्रास्फीति के बारे में आश्वस्त करने वाले बयान देते हैं, तो सुरक्षित निवेश की मांग कम हो जाती है। यह इसलिए होता है क्योंकि निवेशक अब इक्विटी और अन्य जोखिम वाली संपत्तियों में निवेश करने के लिए अधिक सहज महसूस करते हैं, जिससे सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेशों का आकर्षण कम हो जाता है।

इस गिरावट का एक और महत्वपूर्ण कारण डॉलर का मजबूत होना भी हो सकता है। जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो डॉलर-मूल्यवान कमोडिटीज, जैसे सोना और चांदी, उन निवेशकों के लिए अधिक महँगी हो जाती हैं जिनके पास अन्य मुद्राएँ होती हैं। इससे इन धातुओं की मांग कम होती है और उनकी कीमतों पर दबाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त, कुछ विश्लेषक यह भी मान रहे हैं कि यह गिरावट एक 'करेक्शन' का हिस्सा है, यानी बाजार में अत्यधिक तेजी के बाद कीमतों का एक स्वाभाविक समायोजन। पिछले कुछ महीनों में कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई थी, और अब मुनाफावसूली (profit-taking) एक प्रमुख कारक बन गई है, जहाँ निवेशक बढ़ी हुई कीमतों पर अपनी होल्डिंग बेचकर लाभ कमा रहे हैं।

सोने में 9.7% की गिरावट, जो इसे 4,829 डॉलर प्रति औंस पर ले आई है, ने उन निवेशकों को झटका दिया है जिन्होंने ऊँची कीमतों पर इसमें निवेश किया था। वहीं, चांदी में 31% की तीव्र गिरावट, जिससे यह 78.7 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है, एक और चिंताजनक संकेत है। चांदी, जिसे अक्सर 'गरीब आदमी का सोना' कहा जाता है, औद्योगिक उपयोगों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए, इसकी कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट न केवल निवेश के दृष्टिकोण से, बल्कि वैश्विक औद्योगिक मांग के लिए भी कुछ अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकती है, हालांकि यह मुख्य रूप से मौद्रिक नीति और सुरक्षित निवेश की मांग से प्रेरित प्रतीत होती है।

इस स्थिति का वैश्विक बाजारों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। जिन देशों में सोने और चांदी का उत्पादन अधिक होता है, उनकी अर्थव्यवस्थाएँ प्रभावित हो सकती हैं। खनन कंपनियाँ और उनके शेयरधारक भी इस गिरावट से प्रभावित होंगे। इसके अलावा, उपभोक्ता बाजारों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है, जहाँ आभूषणों की मांग पर प्रभाव पड़ सकता है, खासकर भारत और चीन जैसे बड़े उपभोक्ता देशों में।

निवेशकों के लिए, यह समय सावधानी और रणनीतिक सोच का है। जो निवेशक लंबे समय से बहुमूल्य धातुओं में निवेश कर रहे हैं, उनके लिए यह एक अस्थायी झटका हो सकता है, लेकिन नए निवेशकों को बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए सावधानी से निवेश करना चाहिए। कुछ विश्लेषक इसे खरीदने का अवसर भी मान रहे हैं, यह मानते हुए कि दीर्घकालिक रूप से सोना और चांदी अभी भी मूल्यवान संपत्ति बने रहेंगे, खासकर यदि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य फिर से अनिश्चितता की ओर मुड़ता है।

आगे चलकर, फेडरल रिजर्व और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियाँ बहुमूल्य धातुओं की कीमतों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी। यदि ब्याज दरों में वृद्धि की जाती है और तरलता कम की जाती है, तो सोने और चांदी पर दबाव बना रह सकता है। इसके विपरीत, यदि आर्थिक स्थिति बिगड़ती है या मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है, तो इनकी कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं। भू-राजनीतिक घटनाएँ और वैश्विक व्यापार संबंध भी इन धातुओं की मांग और आपूर्ति को प्रभावित करेंगे।

सारांश में, सोना और चांदी के बाजारों में हालिया गिरावट वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलते रुझानों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों के प्रति बाजार की संवेदनशीलता को दर्शाती है। वॉर्श जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों के बयान बाजार की धारणा को कितनी गहराई से प्रभावित कर सकते हैं, यह इस घटना से स्पष्ट होता है। निवेशकों को इस अस्थिर बाजार में सतर्क रहना चाहिए और दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अपने निवेश निर्णयों की समीक्षा करनी चाहिए।