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संयुक्त राष्ट्र पर मंडराया 'आसन्न वित्तीय संकट': महासचिव गुटेरेस ने सदस्य देशों से बकाया चुकाने का किया आग्रह

वैश्विक संस्था की वित्तीय स्थिति गंभीर, महासचिव ने तत्काल भु

संयुक्त राष्ट्र पर मंडराया 'आसन्न वित्तीय संकट': महासचिव गुटेरेस ने सदस्य देशों से बकाया चुकाने का किया आग्रह
Ekhbary Editor
2 days ago
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भारत - इख़बारी समाचार एजेंसी

संयुक्त राष्ट्र पर मंडराया 'आसन्न वित्तीय संकट': महासचिव गुटेरेस ने सदस्य देशों से बकाया चुकाने का किया आग्रह

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शुक्रवार को एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा कि वैश्विक संगठन एक 'आसन्न वित्तीय संकट' के कगार पर है। उन्होंने सदस्य देशों से तत्काल अपने बकाया का भुगतान करने का आग्रह किया, ताकि संयुक्त राष्ट्र के महत्वपूर्ण कार्यों और अभियानों को जारी रखा जा सके। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब कई सदस्य देश अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में विफल रहे हैं, जिससे संस्था की तरलता पर गंभीर दबाव पड़ रहा है।

महासचिव गुटेरेस ने न्यूयॉर्क में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि संयुक्त राष्ट्र को अपने कर्मचारियों के वेतन और आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सदस्य देशों ने शीघ्र ही अपने वित्तीय योगदान का भुगतान नहीं किया, तो संयुक्त राष्ट्र को अपने शांति अभियानों, मानवीय सहायता कार्यक्रमों और विकास पहलों सहित कई महत्वपूर्ण सेवाओं को बाधित करना पड़ सकता है। यह स्थिति वैश्विक कूटनीति, शांति स्थापना और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए गंभीर निहितार्थ रखती है।

संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय संरचना सदस्य देशों द्वारा किए गए अनिवार्य और स्वैच्छिक योगदान पर निर्भर करती है। अनिवार्य योगदान में नियमित बजट और शांति स्थापना बजट शामिल हैं, जो सदस्य देशों की आर्थिक क्षमता के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं। दुर्भाग्य से, कई वर्षों से, संयुक्त राष्ट्र को अपने सदस्य देशों से समय पर और पूर्ण भुगतान प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या विशेष रूप से बड़े योगदानकर्ताओं के बीच अधिक स्पष्ट है, जिनके बकाया की राशि काफी अधिक होती है।

गुटेरेस ने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र केवल तभी प्रभावी ढंग से कार्य कर सकता है जब उसके पास आवश्यक वित्तीय संसाधन हों। उन्होंने कहा, "हमारी वित्तीय स्थिति गंभीर है। हमें एक गंभीर तरलता संकट का सामना करना पड़ रहा है। हम अपने महत्वपूर्ण जनादेश को पूरा करने में सक्षम नहीं होंगे यदि सदस्य देश अपने बकाया का भुगतान नहीं करते हैं।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संयुक्त राष्ट्र ने लागत में कटौती और दक्षता बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं, लेकिन ये उपाय तब तक पर्याप्त नहीं होंगे जब तक कि सदस्य देश अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करते।

वित्तीय संकट का प्रभाव संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अंगों और एजेंसियों पर पड़ना तय है। उदाहरण के लिए, शांति अभियानों को कर्मियों और उपकरणों के लिए भुगतान में देरी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे संघर्ष क्षेत्रों में उनकी प्रभावशीलता कम हो सकती है। मानवीय सहायता संगठनों को आपातकालीन राहत प्रदान करने में बाधाएं आ सकती हैं, जिससे लाखों कमजोर लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के प्रयासों को भी धक्का लग सकता है, क्योंकि विकास कार्यक्रमों के लिए धन की कमी हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह वित्तीय संकट संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। यदि वैश्विक संस्था अपने मूलभूत कार्यों को पूरा करने में असमर्थ हो जाती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद के सिद्धांत को कमजोर कर सकता है। यह ऐसे समय में विशेष रूप से चिंताजनक है जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, महामारी, संघर्ष और आर्थिक असमानता जैसी जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है, जिनके लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।

यह पहली बार नहीं है जब संयुक्त राष्ट्र ने वित्तीय संकट की चेतावनी दी है। अतीत में भी ऐसी स्थितियां उत्पन्न हुई हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति को विशेष रूप से गंभीर माना जा रहा है। महासचिव ने सदस्य देशों से राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने और अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सभी सदस्य देशों का साझा मंच है, और इसकी सफलता सामूहिक जिम्मेदारी पर निर्भर करती है।

इस वित्तीय संकट के पीछे कई कारक हो सकते हैं, जिनमें कुछ सदस्य देशों में घरेलू आर्थिक चुनौतियां, संयुक्त राष्ट्र के कुछ कार्यों या नीतियों को लेकर असहमति, और वैश्विक राजनीतिक तनाव शामिल हैं। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत, सदस्य देशों को अपने योगदान का भुगतान करना अनिवार्य है। इन भुगतानों में देरी या चूक न केवल संस्था के संचालन को बाधित करती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाती है।

गुटेरेस ने कहा कि उन्होंने सदस्य देशों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास किया है, लेकिन समय तेजी से निकल रहा है। उन्होंने एक बार फिर सभी देशों से अपने बकाया का तुरंत भुगतान करने का आग्रह किया, ताकि संयुक्त राष्ट्र अपनी वैश्विक जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा सके और दुनिया भर में शांति, सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देने के अपने जनादेश को पूरा कर सके। यह देखना बाकी है कि सदस्य देश इस गंभीर चेतावनी पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वे संयुक्त राष्ट्र को इस आसन्न संकट से निकालने के लिए आवश्यक कदम उठाते हैं। वैश्विक समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अंतरराष्ट्रीय सहयोग का यह महत्वपूर्ण स्तंभ अपनी वित्तीय स्थिरता बनाए रख पाएगा।

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने बताया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो उन्हें गैर-जरूरी यात्राओं को रद्द करना, बैठकों को स्थगित करना और यहां तक कि कुछ विकास परियोजनाओं को रोकना पड़ सकता है। इससे उन लाखों लोगों पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जो संयुक्त राष्ट्र की सहायता पर निर्भर हैं। महासचिव ने चेतावनी दी कि यदि इन उपायों को लागू किया गया, तो यह संगठन की वैश्विक पहुंच और प्रभावशीलता को गंभीर रूप से सीमित कर देगा। उन्होंने सदस्य देशों से अपील की कि वे इस स्थिति की गंभीरता को समझें और तत्काल कार्रवाई करें।

यह संकट ऐसे समय में आया है जब बहुपक्षवाद पर पहले से ही सवाल उठाए जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय अस्थिरता उन लोगों के तर्कों को और मजबूत कर सकती है जो अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की प्रासंगिकता पर संदेह करते हैं। इसलिए, संयुक्त राष्ट्र के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह इस वित्तीय चुनौती से सफलतापूर्वक निपटे ताकि अपनी वैश्विक भूमिका को बनाए रख सके और एक अधिक शांतिपूर्ण और समृद्ध दुनिया के निर्माण में अपना योगदान जारी रख सके।