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Sunday, 01 February 2026
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जापानी व्यापार जगत के नेता ने कमज़ोर येन दर पर सरकार से अधिक कार्रवाई करने का आह्वान किया: छोटे व्यवसायों पर बढ़ता दबाव

घटती क्रय शक्ति और बढ़ती आयात लागत के बीच, जापान के छोटे और

जापानी व्यापार जगत के नेता ने कमज़ोर येन दर पर सरकार से अधिक कार्रवाई करने का आह्वान किया: छोटे व्यवसायों पर बढ़ता दबाव
Ekhbary Editor
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जापान - इख़बारी समाचार एजेंसी

जापानी व्यापार जगत के नेता ने कमज़ोर येन दर पर सरकार से अधिक कार्रवाई करने का आह्वान किया: छोटे व्यवसायों पर बढ़ता दबाव

जापान के व्यापार जगत के एक प्रमुख नेता ने सरकार से देश की मुद्रा, येन की लगातार कमज़ोरी पर अधिक सक्रिय और निर्णायक कार्रवाई करने का आह्वान किया है। यह अपील ऐसे समय में आई है जब कमज़ोर येन छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों (एसएमई) के लिए आयात लागत को बढ़ाकर और वेतन वृद्धि की गुंजाइश को संकीर्ण करके गंभीर आर्थिक चुनौतियाँ पैदा कर रहा है। इस स्थिति ने न केवल व्यवसायों के लाभ मार्जिन को प्रभावित किया है, बल्कि कर्मचारियों की क्रय शक्ति पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला है, जिससे जापान की अर्थव्यवस्था में व्यापक चिंताएँ उत्पन्न हो रही हैं।

जापान की अर्थव्यवस्था, जो लंबे समय से निर्यात-उन्मुख रही है, ऐतिहासिक रूप से एक कमज़ोर येन से लाभान्वित हुई है क्योंकि यह जापानी उत्पादों को विदेशी खरीदारों के लिए सस्ता बनाता है। हालाँकि, हाल के वर्षों में, विशेष रूप से ऊर्जा और कच्चे माल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के साथ, येन की अत्यधिक कमज़ोरी ने एक दोधारी तलवार का रूप ले लिया है। जबकि बड़े निर्यातकों को अभी भी कुछ लाभ मिल सकता है, घरेलू बाजार पर केंद्रित छोटे व्यवसायों के लिए यह एक गंभीर बोझ बन गया है। वे आयातित वस्तुओं पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं, चाहे वह उत्पादन के लिए कच्चा माल हो, ऊर्जा हो, या तैयार उत्पाद जो वे बेचते हैं। येन के मूल्य में गिरावट का सीधा मतलब है कि इन वस्तुओं को खरीदने के लिए उन्हें अधिक येन खर्च करना पड़ता है, जिससे उनकी परिचालन लागत बढ़ जाती है।

टोक्यो में एक हालिया व्यापार शिखर सम्मेलन में, कई उद्योग विशेषज्ञों और व्यापारिक अधिकारियों ने इस मुद्दे पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कैसे छोटे रेस्तरां, खुदरा विक्रेता और विनिर्माण कंपनियाँ ऊर्जा बिलों और आयातित खाद्य पदार्थों या घटकों की बढ़ती लागत से जूझ रही हैं। एक छोटी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी के मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमारी लागतें बढ़ रही हैं, लेकिन हम ग्राहकों को खोने के डर से अपनी कीमतें उतनी नहीं बढ़ा सकते। इसका मतलब है कि हमारा लाभ मार्जिन सिकुड़ रहा है, और हम अपने कर्मचारियों को पर्याप्त वेतन वृद्धि देने में असमर्थ हैं, भले ही वे इसके हकदार हों।” यह एक सामान्य शिकायत है जो पूरे एसएमई क्षेत्र में गूँज रही है।

वेतन वृद्धि की गुंजाइश का संकीर्ण होना जापान की अर्थव्यवस्था के लिए एक विशेष रूप से गंभीर समस्या है। दशकों से, जापान अपस्फीति (deflation) के एक चक्र से जूझ रहा है, जहाँ कीमतें और वेतन स्थिर रहे हैं या गिर गए हैं। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने लगातार अपनी अति-ढीली मौद्रिक नीति (ultra-loose monetary policy) को बनाए रखा है, जिसका लक्ष्य मुद्रास्फीति को बढ़ावा देना और वेतन वृद्धि को प्रोत्साहित करना है। हालाँकि, येन की कमज़ोरी, जो आंशिक रूप से बीओजे की नीति और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि के बीच व्यापक अंतर का परिणाम है, ने वांछित प्रभाव देने के बजाय विपरीत परिणाम दिए हैं। आयातित मुद्रास्फीति ने जीवन-यापन की लागत बढ़ा दी है, लेकिन व्यवसायों की वेतन बढ़ाने की क्षमता सीमित होने के कारण, वास्तविक मजदूरी में गिरावट आई है। इससे उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति कम हुई है, जिससे समग्र आर्थिक विकास बाधित हो रहा है।

सरकार के सामने एक जटिल दुविधा है। एक ओर, वे येन को बहुत मज़बूत नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि इससे जापान के बड़े निर्यातकों को नुकसान हो सकता है और आर्थिक सुधार की गति धीमी हो सकती है। दूसरी ओर, वे घरेलू अर्थव्यवस्था को कमज़ोर येन के नकारात्मक प्रभावों से भी बचाना चाहते हैं। अब तक, सरकार ने मुख्य रूप से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने के बजाय मौखिक चेतावनी और सीमित राजकोषीय उपायों के माध्यम से स्थिति को संभालने की कोशिश की है। हालाँकि, व्यापारिक नेताओं का तर्क है कि ये उपाय अपर्याप्त हैं और एक अधिक ठोस रणनीति की आवश्यकता है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस स्थिति को संबोधित करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी। इसमें संभावित रूप से बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति की समीक्षा, छोटे व्यवसायों के लिए लक्षित सब्सिडी या कर राहत, और ऊर्जा दक्षता में निवेश जैसे दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधार शामिल हो सकते हैं ताकि आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम हो सके। कुछ लोग तो येन को स्थिर करने के लिए सीधे मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने की भी वकालत कर रहे हैं, जैसा कि अतीत में किया गया है, लेकिन ऐसा कदम महत्वपूर्ण जोखिमों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया के साथ आता है।

जापान की जनसांख्यिकीय चुनौतियाँ, जिसमें एक तेज़ी से बूढ़ी होती आबादी और घटती कार्यबल शामिल है, इस आर्थिक दबाव को और बढ़ाती हैं। कमज़ोर येन और स्थिर वेतन का मतलब है कि जापान विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करने और अपने स्वयं के युवा श्रमिकों को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर सकता है, जो दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि छोटे व्यवसाय, जो जापानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, संघर्ष करते रहते हैं, तो इसका पूरे देश में रोज़गार और नवाचार पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले महीनों में जापान के आर्थिक प्रक्षेपवक्र को आकार देने में महत्वपूर्ण होगी। व्यापारिक नेताओं की अपील एक स्पष्ट संकेत है कि यथास्थिति अब टिकाऊ नहीं है। जापान को एक ऐसी रणनीति खोजने की ज़रूरत है जो निर्यात क्षेत्र के लाभों को संतुलित करे और साथ ही घरेलू व्यवसायों और उपभोक्ताओं की रक्षा करे। यह संतुलन प्राप्त करना आसान नहीं होगा, लेकिन जापानी अर्थव्यवस्था के भविष्य के लिए यह आवश्यक है। वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता के इस युग में, घरेलू स्थिरता सुनिश्चित करना किसी भी राष्ट्र के लिए सर्वोपरि है, और जापान के लिए, यह येन की कमज़ोरी के मुद्दे को प्रभावी ढंग से संबोधित करने से शुरू होता है।

यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कमज़ोर येन का प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग होता है। जबकि पर्यटन उद्योग को एक कमज़ोर येन से लाभ हो सकता है क्योंकि यह विदेशी पर्यटकों के लिए जापान को अधिक किफायती बनाता है, अन्य क्षेत्र जैसे कि कृषि, जो आयातित उर्वरकों और चारा पर निर्भर करता है, गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं। इसके अलावा, उपभोक्ता वस्तुओं की बढ़ती कीमतें परिवारों के बजट पर दबाव डालती हैं, जिससे विवेकाधीन खर्च कम होता है और आर्थिक विकास की संभावनाएँ सीमित होती हैं।

जापान के व्यापार जगत के नेताओं का आह्वान केवल एक वित्तीय चिंता से कहीं अधिक है; यह देश की सामाजिक स्थिरता और भविष्य की समृद्धि के बारे में एक व्यापक चिंता को दर्शाता है। सरकार को इन चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए और एक व्यापक योजना विकसित करनी चाहिए जो न केवल येन के मूल्य को स्थिर करे, बल्कि छोटे व्यवसायों को समर्थन दे और यह सुनिश्चित करे कि जापान के नागरिक एक उचित जीवन स्तर बनाए रख सकें। इस महत्वपूर्ण मोड़ पर निष्क्रियता के गंभीर और दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं।